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लोकसभा चुनाव में भाजपा हुई हाफ - Ahirwal Today

मनोहर सरकार की नीतियां हरियाणा के मतदाताओं को नहीं लुभा रही जातीय समीकरण भी दिखाएगा असर।

धर्मनारायण शर्मा । नारनौल

हरियाणा में वर्ष 2019 के चुनाव में प्रदेश की सभी 10 लोकसभा सीटों पर विजय पाने वाली भारतीय जनता पार्टी के हालात इस समय लगातार बदहाल होते जा रहे हैं। चुनाव का परिणाम क्या रहेगा, यह तो 25 मई को होने वाले मतदान के बाद 4 जून को मतगणना से स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन आज हालात 10 में से पांच यानी हाफ के हैं। यानी भारतीय जनता पार्टी पांच सीटों पर जीत पाने की स्थिति में बताई जा रही है।

यह अनुमान आम आदमी की जुबान और सट्टा बाजार तथा राजनीतिक विश्लेषकों के आधार पर है। अभी चुनाव अपना रंग दिखाएगा। बड़े नेताओं का हरियाणा में दौरा होगा। क्योंकि मतदान में अभी 16 दिन का समय बाकी है और इसमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री समेत भाजपा की ओर से अनेक वरिष्ठ नेता और कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत अनेक बड़े चेहरे चुनावी सभाएं करेंगे। वह मौजूदा समीकरण भी बदलने का प्रयास करेंगे।

कैसे हो रही है भाजपा हाफ

अब बात करते हैं कि बीजेपी हरियाणा में हाफ की स्थिति में क्यों आ रही है। तो आम लोगों के बीच चर्चा से एक बात प्रमुख रूप से सामने आ रही है कि इसमें सबसे बड़ा कारण हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में भाजपा जननायक जनता पार्टी गठबंधन सरकार का रहा। यह सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर पाई। गठबंधन समाप्ति के बाद तो अब जिस प्रकार से दोनों ही दलों के नेताओं और उम्मीदवारों को जन विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वह साढे चार साल के कार्यकाल की स्थिति को भी भली भांति दिख रहा है।

दूसरा कारण सामने आया वह मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व को केंद्र की हरी झंडी मिलना और उनके काम की निरंतर प्रशंसा करना। इससे भी सीएम रहे मनोहर लाल का दिमाग सातवें पर आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने कार्यकर्ताओं और संगठन की उपेक्षा करते हुए अपने आपको ही सुपर हीरो मान लिया। गए बगाहे अमित शाह और नरेंद्र मोदी द्वारा मनोहर लाल खट्टर के सुशासन की प्रशंसा किए जाने ने सोने पर सुहागे का काम कर दिया। हरियाणा में अनेक कार्यक्रमों में आकर वे उनकी पीठ थपाकर गए जबकि मुख्यमंत्री भले ही केंद्र की नीतियों को लागू करने में जुटे रहे हो लेकिन वह जनता के बीच लोकप्रिय कभी नहीं रहे। उन्होंने कई बार अपने बिगड़े बोलो से भी स्थिति को बिगड़ने का काम किया। भले ही उन्होंने किसी महिला को चंद्रयान पर भेजने की बात की हो या महेंद्रगढ़ के दोंगडा अहीर में रात्रि विश्राम के दौरान ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन और बंधक बनाए जाने वाले हालात का सामना करना पड़ा हो।

 तीसरा कारण भारतीय जनता पार्टी का कागजी संगठन रहा। ओमप्रकाश धनखड़ ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सरकार के समानांतर संगठन को मजबूत बनाने का काम किया और उसकी शिकायत दिल्ली दरबार तक भी पहुंची। लिहाजा धनखड़ को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। लेकिन बदले में जिस नायब सैनी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, उसे पार्टी चलाने का ज्यादा अनुभव नहीं था। भले ही ओबीसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर यह बदलाव किया गया हो। नए हालात में मनोहर लाल संगठन और सरकार दोनों को अपने तरीके से अपने हाथों में रखने में सफल रहे। लेकिन उसके बाद मनोहर लाल खट्टर का इस्तीफा और नायब सिंह सैनी को ही मुख्यमंत्री बना देना, इसे सरकार की सूझबूझ का निर्णय नहीं माना जा रहा। इससे एक लाभ तो हुआ, ओबीसी वर्ग मैं सैनी समाज का समस्त वोट बैंक पार्टी की ओर झुक गया, लेकिन ओबीसी में शामिल अन्य वर्गों खासकर यादव को भी इसमें अपेक्षा महसूस हुई। इसके बड़े नेता राव इंद्रजीत सिंह के यह शब्द आज याद दिलाने के लिए काफी हैं जब उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या संगठन का मुखिया बदले जाने के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। यानी सब लोग इस हैरत भरे निर्णय से नाराज थे। भारतीय जनता पार्टी के बारे में एक बात पिछले कई महीनो से कही जा रही थी कि यह दल जीटी रोड और दक्षिण हरियाणा में ही मजबूत है। जाटलैंड और पश्चिमी हरियाणा या उत्तरी हरियाणा में इसकी पकड़ कमजोर हो चुकी है। हैरानी की बात है कि फिर भी चुनाव से पहले इस जनमत को ध्यान में रखकर निर्णय नहीं लिए गाय। 

हरियाणा के बड़े शहरों की भी हुई अपेक्षा

बाद में जिस तरीके से मंत्रिमंडल में बदलाव किया और गृहमंत्री अनिल विज तक ने इस पर अचरज जताया तो साफ हो गया कि मनोहर लाल पर केंद्र के संगठन ने विश्वास किया और हरियाणा में स्थिति को सही प्रकार से समझने में नाकामी हुई। जिसका परिणाम आज की स्थिति में दिख रहा है। हो सकता है कि इसमें कल बदलाव हो जय। लेकिन इतना तो है कि भारतीय जनता पार्टी 10 की 10 सीट दोबारा हासिल नहीं कर रही है। इस चुनाव में एक बात और भी है, वह है पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया गया है । कैप्टन अभिमन्यु, ओम प्रकाश धनखड़, रामबिलास शर्मा, अनिल विज, सुधा यादव समेत अनेक बड़े चेहरे कार्यक्रमों में दिख तो रहे हैं, लेकिन उतना नहीं जितनी सक्रियता की उम्मीद थी। अगर परिणाम बदले तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा के उन शब्दों को भी भविष्य के लिए ध्यान में रखना होगा जो उन्होंने एक मंच से अपने संबोधन में कहे थे कि 4 जून के बाद हरियाणा में बड़ा बदलाव हो सकता है।

 

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