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वकीलों का 12 दिन से जारी अदालती कामकाज से बहिष्कार लोग हो रहे परेशान - Ahirwal Today

विरोधी मुवक्किल के वकील से मारपीट मामले का अब तक नहीं निकला हल, वकील एफ आई आर दर्ज कराने की मांग पर अड़ी। सामाजिक न्याय राज्यमंत्री से की मुलाकात। जिला सत्र न्यायाधीश और एसपी से हुई बातचीत।

अहीरवाल टुडे न्यूज। नारनौल

वकीलों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए जिला बार एसोसिएशन के वकीलों द्वारा अपने आपको न्यायिक कार्य से अलग रखने के लिए चलाई जा रही मुहिम सोमवार 12वें दिन भी जारी रही।  18 मई से जिला बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ता बार के पूर्व प्रधान मनीष वशिष्ठ व अन्य अधिवक्ताओं के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को रद्द करने को लेकर अदालती काम से अलग हैं। 

बता दें कि 26 अप्रेल को एक विरोधी मुव्वकिल घाटासेर निवासी संदीप यादव ने अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ के साथ गाली गलौच की थी व हमला किया था, जिस पर पुलिस ने संदीप के विरुद्ध मामला दर्ज करके हिरासत में ले लिया था। उसके बाद 12 मई को पुलिस ने मनीष वशिष्ठ एडवोकेट व अन्य वकीलों के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज कर दिया था। वकीलों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जानकारी होने के बाद 17 मई को जिला बार एसोसिएशन के प्रधान राजकुमार रामबास की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि जब तक वकीलों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर रदद् नहीं हो जाती तब तक सभी वकील अपने आप को न्यायिक कार्य से अलग रखेंगे। इस एफआईआर के विरोध के चलते वकीलों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए, अपने आपको न्यायिक कार्यों से अलग किये हुए हैं।बा

इसी मामले में जिला बार एसोसिएशन नारनौल के 8 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को बार प्रधान राजकुमार रामबास की अगुवाई में सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री ओम प्रकाश यादव से मुलाकात की। इस प्रतिनिधि मंडल में बार प्रधान के अतिरिक्त पूर्व प्रधान कर्णसिंह यादव, पूर्व प्रधान यशवंत यादव, एडवोकेट चैम्बर सोसाइटी के पूर्व प्रधान राकेश महता, वरिष्ठ एडवोकेट उमराव सिंह कौशिक, प्रेम चंद गुप्ता एडवोकेट, ओम प्रकाश यादव मांदीवाला व जसबीर सिंह ढिल्लो एडवोकेट थे। उन्होने राज्य मंत्री को सारी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद शाम को इस प्रतिनिधि मंडल की बैठक जिला व सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल व पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण के साथ भी हुई। जिसमें प्रतिनिधि मंडल द्वारा कहा गया कि वकीलों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को रद्द होने तक कार्य बहिष्कार को वापस नही लिया जाएगा।

बार प्रधान राजकुमार रामबास ने कहा कि वकीलों के कार्यस्थल पर कोई क्लाइंट, वकील के साथ अभद्रता करेगा, गाली गलौच करेगा, मारपीट करेगा, फिर वकीलों के विरुद्ध ही एफआईआर दर्ज होगी तो कोई वकील काम ही नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे तो हर कोई वकील को गाली गलौच करके व उस पर हमला करके, उल्टा वकील के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज करवा देगा। फिर ऐसे माहौल में वकील जनता को न्याय कैसे दिला पाएंगे।

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