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10 में से 10 का परिणाम लाना भाजपा के लिए कड़ी चुनौती - Ahirwal Today

हरियाणा में भाजपा उम्मीदवारों को हर तरफ कड़े प्रतिरोध का करना पड़ रहा है सामना। ब्राह्मण समुदाय को भी राजी करना नहीं रहेगा सहज।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीट और कांग्रेस की ओर से गुड़गांव को छोड़कर बाकी आठ सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा तथा इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी के खाते में गई कुरुक्षेत्र की सीट के बाद अब चुनावी समर गर्मी पकड़ने लगा है ।

जिस तरीके से कांग्रेस की ओर से  उम्मीदवारो के नामो का ऐलान होने के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के एक महीने पहले से ही हरियाणा में अधिकांश उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक  जो विरोध प्रदर्शन की स्थितियां सामने आ रही है, उससे लगता है कि हरियाणा में इस बार पिछले चुनाव परिणाम नहीं आएंगे।

सभी 10 सीटों पर जमाया था कब्जा

पिछले चुनाव में हरियाणा में भाजपा ने राज्य की सभी 10 की 10 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था, पर इस बार हालात वैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसका बड़ा कारण माना जा रहा है कि पार्टी का अपने मूल कैडर पर विश्वास करने की बजाय बाहर से आए अन्य दलों के नेताओं को चुनाव मैदान में उतरना है। इससे कैडर लेवल  और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं में भी निराशा का भाव पैदा हुआ है।

 दूसरा कारण यह है कि दो बार से लगातार हरियाणा में सत्ता हाथ में होने के बावजूद विभिन्न जातीय समीकरणों को भी साधने में भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व नाकाम रहा है। मुख्यमंत्री रहते मनोहर खट्टर द्वारा बोले गए अनर्गल बोल भी अब पार्टी के गले की फांस बन रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि हाल ही में कुलदीप बिश्नोई को मनाने में जिस तरीके के प्रयास किए गए और अब उनके पहली बार विधायक बने पुत्र भव्य बिश्नोई को युवा मोर्चा के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेवारी दी गई है, उससे साफ तौर पर लग रहा है कि डैमेज कंट्रोल करने में पार्टी के नेताओं को पसीने बहाने पड़ेंगे। शायद सब कुछ समय पर हो तो ही स्थिति अनुकूल रहे, अन्यथा परिणाम प्रतिकूल रहने के आसार बन चुके हैं।

बता दें कि यहां बता दें कि हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 6 सीटों पर अपने तथा चार सीटों पर कांग्रेस पार्टी या अन्य दलों से आए उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। इनमें कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और आम आदमी पार्टी से परिक्रमा करके भाजपा में शामिल हुए अशोक तंवर को सिरसा, चौधरी देवीलाल के बेटे और निर्दलीय विधायक रणजीत चौटाला हिसार से चुनाव मैदान में उतारे गए हैं। कुरुक्षेत्र से उद्योगपति नवीन जिंदल को टिकट दी गई है, जिन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता पहले ही कोयला चोर की संज्ञा दे चुके हैं। अंबाला से पूर्व केंद्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया की पत्नी बतो कटारिया को टिकट दी है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद करनाल से चुनाव मैदान में है। सोनीपत से राई के विधायक और पार्टी के प्रदेश महामंत्री मोहनलाल बडोली पर दांव लगाया गया है। इसके अलावा चार संसदीय क्षेत्र ऐसे हैं जहां से मौजूदा सांसदों को ही पार्टी ने फिर मैदान में उतारा है इनमें गुरुग्राम से राव इंद्रजीत सिंह, फरीदाबाद से कृष्ण पाल गुर्जर, भिवानी महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से चौधरी धर्मवीर सिंह तथा रोहतक से अरविंद शर्मा को लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में है।

अधिकांश को अपने क्षेत्र में विरोध का करना पड़ रहा है सामना

अभी तक की जो स्थितियां सामने आ रही हैं उनके मुताबिक कृष्णपाल गुर्जर, राव इंद्रजीत सिंह कुछ सुरक्षित स्थिति में है। अरविंद शर्मा और चौधरी धर्मवीर सिंह को वोटरों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। रणजीत सिंह चौटाला तथा अशोक तंवर की उनके ही संसदीय क्षेत्र में लोगों ने बुरी हालत कर दी है। कुरुक्षेत्र में सुशील गुप्ता के मुकाबले नवीन का कद अभी बड़ा नहीं हुआ है। वरुण मुलाना के सामने बटो कटारिया की भी हालत पतली बनी हुई है। कांग्रेस ने सोनीपत से सतपाल ब्रह्मचारी को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मैदान मिलकर बडोली को कड़े संघर्ष के सामने ला खड़ा किया है। सबसे विचित्र स्थिति तो करनाल लोकसभा क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करनाल शहर सीट से विधानसभा चुनाव और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करनाल लोकसभा से बतौर सांसद बनने के लिए चुनाव मैदान में हैं। यहां ही उन्हें लोगों का प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा ब्राह्मण नाराज

करनाल में पंडित चिरंजीलाल शर्मा, आईडी स्वामी समेत अनेक ब्राह्मण चुनाव जीत चुके हैं लेकिन इस बार ब्राह्मण ही मौजूदा मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ वोट खड़ा हुआ है। यही कारण है कि राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा को आगे रखकर करनाल में ब्राह्मण सम्मेलन करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए कार्तिकेय लगातार प्रदेश भर में ब्राह्मणों से संपर्क बनाए हुए हैं। उन्हें भी लोग भाजपा की 9:30 साल की सरकार को ब्राह्मण विरोधी बताते हुए उनका विरोध कर रहे है। पहरावर मामले में भी मुख्यमंत्री रहते हुए मनोहर लाल को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता रामबिलास शर्मा की मौजूदा दौर में उपेक्षा और अनेक प्रमुख ब्राह्मण नेताओं को महत्व न दिए जाने से भी यह समाज नाराज है। मतदान से पहले इस को मनाना टेडी खीर साबित होने वाला है।

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