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वकीलों की नाराजगी का निदान, पुलिस प्रशासन नाकाम - Ahirwal Today

6 दिन से अदालती कामकाज का बहिष्कार कर रहे वकील अब 24 को सीएम के सामने जताएंगे विरोध।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

विरोधी पक्ष के मुव्वकील द्वारा एक वकील के साथ कोर्ट कंपाउंड में की गई मारपीट का मामला अब तूल पकड़ गया है। पिछले 6 दिनों से वकीलों द्वारा अदालती कामकाज के बहिष्कार की करने के निर्णय का अब व्यापक असर दिखाई देने लगा है। सोमवार को इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश न्यायाधीशों के अवकाश पर रहने से मामला अधर में लटका रहा। अब वकीलों ने केस समाप्त ना किए जाने की वापस सूरत में 24 मई से कड़े तेवर के साथ अपना आंदोलन आगे बढ़ाने की घोषणा की है।

जिला बार एसोसिएशन की ओर से इस संबंध में 24 मई को अपनी बैठक बुलाई है। उसी दिन से मुख्यमंत्री मनोहर लाल जिला महेंद्रगढ़ में जनसंवाद करने के लिए तीन दिवसीय पड़ाव डालेंगे। मुख्यमंत्री की उपस्थिति के दौरान वकीलों द्वारा उठाए जाने वाले कड़े कदमों को देखते हुए पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के हाथ पांव फूले हुए हैं, लेकिन उन्हें बीच का रास्ता नहीं सूझ पा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कुछ वरिष्ठ वकीलों के प्रयास के बाद पुलिस, न्याय क्षेत्र और वकीलों के बीच सोमवार को संयुक्त बैठक किए जाने की बातचीत चली थी। इसके लिए रविवार को माहौल भी बनाया गया था, लेकिन सोमवार ऐसी कोई बैठक नहीं हो पाई। दूसरी ओर इससे पहले जिला बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ गुरूवार को एसपी के साथ हुई बैठक में इस मामले में दो-तीन दिन का समय मांगा था। वकीलों का कहना था कि एफआईआर रद्द की जानी चाहिए। इस पर एसपी ने मामले के सभी पहलुओं की जांच करने का आश्वासन दिया था इसके बावजूद सोमवार कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

हड़ताल से आमजन पर पड़ने लगा असर

 जानकारी के मुताबिक वकीलों ने अपने इस हड़ताल के दौरान किसी भी अदालत में उपस्थित में होने तथा प्रॉक्सी को भी ना भेजे जाने का निर्णय लिया था। उसका असर यह पड़ रहा है कि जिन लोगों के अदालती मामलों में तारीखे लगी हुई थी या कुछ लोग न्यायिक हिरासत में होने के कारण उनकी जमानत याग्निक जमानत याचिका लगाई जानी थी, वह काम अभी पेंडिंग पड़ा है। दूसरे अपने केसों की सुनवाई के लिए लोग लगातार अदालती फेरे लगा रहे हैं। वकीलों में वहां उपस्थित होने पर अपनी असमर्थता जता दी है। इस मामले में किसी भी वकील या उसके सहयोगी के न्यायिक परिसर क्षेत्र में जाने पर जिला बार एसोसिएशन की ओर से ₹11000 जुर्माना लगेगा प्रावधान होने के वकील अदालती कामकाज से दूरी बनाए हुए हैं।

मामले का दूसरा पहलू यह है कि केस दर्ज करने के बाद कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश तो की गई, लेकिन जो वीडियो वायरल हुई उसमें वकील द्वारा विरोधी पक्ष के वकील को पीटते हुए दिखाया गया है। ऐसे में पुलिस के लिए भी केस को वापस लेना सहज नहीं बन पा रहा है, जबकि वकीलों का कहना है कि उस पर हाथापाई से पहले जो विरोधी मौत के वकीलों के साथ गाली गलौज की थी, वह उस वीडियो में सुनाई नहीं पड़ रही है। इसलिए उन्हें ही दोषी मान लिया गया है।

मामले का तीसरा पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री 24 मई से तीन के जनसंवाद कार्यक्रम के लिए जिले में रहेंगे। अपनी किरकरी या सीएम की टेेढ़ी नज़र से बचने की फिराक में लगा प्रशासन इस दौरान किसी भी विवाद की स्थिति से बचना चाहेगा। दूसरी तरफ वकीलों का खेमा आक्रामक मुद्रा में है।

जिला बार एसोसिएशन के प्रधान राजकुमार एडवोकेट का कहना है कि जिस तरीके से बाहर के वकील को पीटा गया है, अगर अभी कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो  भविष्य में कोर्ट कंपाउंड में कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि हड़ताल के बाद ही वीडियो वायरल क्यों की गई। इससे भी पुलिस की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक जब गुरुवार को एसपी के साथ मीटिंग हुई थी, तब उन्होंने दो-तीन दिन का समय मांगा था। शनिवार रविवार का अवकाश होने के बाद आज इस मामले में कार्रवाई करनी थी। उनका कहना है कि पुलिस ने जिस तरीके से इस मामले में दर्ज करके वकीलों पर दबाव बनाने का प्रयास किया है वह गलत है। वकीलों के स्वाभिमान से खिलवाड़ किया गया, इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। 24 मई को सुबह मीटिंग करेंगे उसमें कोई कड़ा निर्णय भी लिया जाएगा।

 

 

 

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