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राव इंद्रजीत सिंह से बराबरी, अभय सिंह यादव के लिए अभी दूर की कौड़ी - Ahirwal Today

दोगड़ा अहीर की 10 दिसंबर की रैली सफल रहेगी, पर इंद्रजीत के सामने बड़ा कद करने के लिए अभय सिंह को और लगाना होगा वक्त।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

सवाल है कि 8 मई 2018, 25 मई 2023 और अब 10 दिसंबर 2023 में क्या समानता है। जवाब है कि इन तीनों तारीखों में दोगड़ा अहिर गांव ना केवल किसी ना किसी प्रकार से राजनीतिक कार्यक्रम के केंद्र में रहा, अपितु चर्चा में भी रहा।

8 मई 2018 को यहां केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपनी जनसभा की थी। यहां उन्होंने क्षेत्र के विकास के नाम पर अपने समर्थ कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान किया। इसी साल यानी मई 2023 को जिला महेंद्रगढ़ के विभिन्न हलकों में जन संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय दौरे पर आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 25 मई को यहां पड़ाव किया था । यहां आने से पहले नारे विधानसभा क्षेत्र के अपने अंतिम कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सीहमा गांव में सीमा को उप तहसील बनाए जाने की घोषणा की थी इसका डूंगरा अहीर के लोगों के दिलों पर उल्टा प्रभाव पड़ा क्योंकि वे लोग यहां अपने गांव को वर्षों से उप तहसील बनाए जाने का मुद्दा उठाई चले आ रहे थे और उन्हें इस संबंध में आश्वासन भी मिल रहे थे।

सीहमा को उप तहसील घोषित किए जाने पर सीएम को दोगड़ा अहीर के ग्रामीणों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। रात भर तमिल विरोध प्रदर्शन करते रहे और मुख्यमंत्री को यहां बंधक की स्थिति में रहना पड़ा सुबह बहुत मुश्किल से ग्रामीणों को उनकी मांग पूरी करने के लिए तीन सदस्य कमेटी बनाने का आश्वासन देने के बाद मुख्यमंत्री गांव से अगले कार्यक्रम के लिए निकल पाए हालांकि वह मसाला अब तक फाइलों में ही अटका हुआ है और इसके लिए यहां के ग्रामीणों में अभी भी सरकार के प्रति रोष भी है।

 अब 10 दिसंबर 2023 यानि रविवार को इसी गांव में एक बार फिर रैली होने जा रही है। विकसित भारत जन विश्वास के नाम से होने वाली यह रैली भी शुरुआत से पहले ही चर्चाओं में है। इसके संयोजक नांगल चौधरी के विधायक डॉक्टर अभय सिंह यादव पिछले करीब 1 महीने से लगातार इस रैली को करने के लिए जिले के चारों हल्का में जनसंपर्क अभियान चलाए हुए हैं। उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की। चर्चा की बात यह है कि वह एकला चलो की तर्ज पर इस रैली के लिए कार्यक्रम करते रहे। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं यहां तक की पदाधिकारी को भी अपने साथ नहीं रखा। लिहाजा भाजपा संगठन और विधायक के बीच दूरी बन गई जिसे अब रैली होने के 2 दिन पहले पार्टी के प्रादेशिक स्तर के वरिष्ठ नेताओं के दखल के बाद दूर किया गया है। संभावना यही है कि 10 दिसंबर को दोंगडा अहीर में होने वाली है रैली जिले की सफलतम रैलियों में शुमार होने वाली मानी जा रही है, लेकिन इसके मंच पर एकजुट दिखने के बावजूद संगठन के नेताओं और नांगल चौधरी के विधायक के बीच दूरी दिखाई देने की संभावना भी बनी हुई है।

रामबिलास शर्मा से मिले डॉक्टर अभय सिंह

गुरुवार को कोर कमेटी की मीटिंग के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता रामबिलास शर्मा की अनुपस्थिति चर्चा में रही। बाद में पता चला कि वे अहमदाबाद गए हुए हैं। शुक्रवार वे इलाके में लौटे तो शनिवार सुबह नांगल चौधरी के विधायक और रैली संयोजक डॉ अभय सिंह यादव ने उनसे उनके सतनाली स्थित निवास पर जाकर मुलाकात की। बताया जाता है कि दोनों नेताओं के बीच इस कार्यक्रम को लेकर बातचीत हुई। साथ ही जो गिले शिकवे थे, उन्हें भी दूर करने का प्रयास किया गया। उसके बाद रामबिलास शर्मा ने रैली में आने का आश्वासन दिया। सूत्रों के अनुसार पता चला कि इस संबंध में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी की ओर से तथा पार्टी प्रभारी की ओर से भी रामबिलास शर्मा को निर्देश प्राप्त हुए हैं। ऐसे में वह अब मंच पर नजर आएंगे

राजनीतिक कद बढ़ाने की इच्छा रखते हैं विधायक

अगर बात करें कि इस रैली का बड़ा उद्देश्य क्या है तो प्रत्यक्ष में तो जिला महेंद्रगढ़ में हरियाणा और केंद्र सरकार द्वारा पिछले 9 सालों के कार्यों की सिलसिले वार जानकारी देकर लोगों का केंद्र वह राज्य की नीतियों तक पहुंचना है, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर इस रैली के आयोजक डॉक्टर अभय सिंह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को परवान चढ़ने से पहले जिले में अपनी ताकत को परख ने के प्रयास में हैं। यही कारण है कि उन्होंने यह रैली करने के लिए ऊपर से निर्देश प्राप्त किया । अकेले ही इस रैली को सफल बनाने के लिए जुट भी गए, लेकिन चूक यह हो गई कि वे संगठन को विश्वास में नहीं ले पाए। जब संगठन साथ जुड़ा तो विधायक की प्रस्तावित रैली का नाम भी बदल गया। यानी रैली की सफलता में विधायक की मेहनत लगी और इसका श्रेय भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाई को मिलेगा। कहीं कमी रह गई तो उसका ठीक रहा भी विधायक के सिर फूटने की संभावना बरकरार रहेगी।

इलाके में राव इंद्रजीत के बराबर का वजूद पाना चाहते हैं अभय सिंह

इस रैली के दूसरे कर्म को खोजें तो कहीं ना कहीं डॉक्टर अभय सिंह यादव जहां अहीरवाल में अपने कद को बढ़ाने तथा भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की मुहिम चलाने से पहले अपने राजनीतिक वजूद को तोड़ना चाहते हैं, तो वहीं उनके छुपे हुए टारगेट में अहीरवाल के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले अपनी ताकत को बढ़ाने का भी है। देखा  जाए तो डॉक्टर अभय सिंह यादव नांगल चौधरी से दूसरी बार विधायक बने हैं। पहली बार उनकी जीत में राव इंद्रजीत सिंह की ही ताकत छुपी हुई थी। दूसरे चुनाव में उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से बड़े अंतर से चुनाव जीता। कहा जाता है कि इसमें राव इंद्रजीत सिंह धड़े ने उन्हें हराने के पूरे प्रयास किया किंतु उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इसी के चलते राव इंद्रजीत के खिलाफ डॉक्टर अभय सिंह अपना मोर्चा खोलकर बैठ गए हैं। लेकिन डॉक्टर अभय सिंह फिलहाल राव इंद्रजीत के समक्ष मजबूत नेता बनने का जो अभियान चलाए हुए हैं वह अभी दूर की कौड़ी लगता है।

चार बार विधायक और पांच बार एमपी बने हैं इंद्रजीत सिंह

देखा जाए तो राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल में ऐसे ही नेता नहीं बन गए। उनकी काबिलियत और इलाके में मजबूत पकड़ का अहसास यहां भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और हरियाणा प्रभारी के तौर पर कार्य करते समय देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परख चुके हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री विरेंद्र सिंह के बड़े बेटे राव इंद्रजीत सिंह ने 1977 से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और अब वर्ष 2023 तक के अंत तक हुए चार बार विधायक और दो बार राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने पांच बार लोकसभा का चुनाव जीता, जिसमें तीन बार केंद्र में मंत्री रहे। राव इंद्रजीत सिंह ने 1977 से लेकर अब तक 12 चुनाव लड़े जिनमें 9 में जीत हासिल की और तीन में परास्त भी हुए। इतनी बड़ी राजनीतिक यात्रा और राजनीतिक संघर्ष करने वाले राव इंद्रजीत सिंह के सामने दो बार से विधायक बनने वाले डॉ अभय सिंह यादव बड़ी छलांग लगाने के इस महत्वाकांक्षी अभियान को अगर थोड़ा और वक्त और देते तो शायद उनकी राह ज्यादा आसान हो जाती।

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