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भ्रष्ट सिस्टम पर काबू करना सरकार पर भारी - Ahirwal Today

विभागों के कर्मचारी/ अधिकारी लपेटे में आने के बाद आईएएस पर टारगेट। आईपीएस अफसरों से परहेज पर उठने लगे सवाल।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

राज्य की गठबंधन सरकार का प्रयास है कि सिस्टम में जड़ें जमा चुके भ्रष्ट सिस्टम पर गहरी चोट मारी जय, ताकि आमजन को इससे मुक्ति मिल सके। माना जा रहा है कि चुनाव में भाजपा इसी मुद्दे को मतदाता के सामने अपनी उपलब्धि भी बताएगी। पिछले कुछ दिनों में राज्य के तीन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों के बाद यह बात तेजी से सामने भी आने लगी है कि आगामी समय में कुछ और मामले भी सामने आ सकते हैं। इस मामले में शुक्रवार एक आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। आइए बात करते हैं ऐसे ही मामलों की।

केस 1

1 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के एक मामले में नाम सामने आने पर वर्ष 2012 बैच के आईएएस धर्मेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि सोनीपत में नगर निगम के कमिश्नर रहते हुए नगर निगम के भवन निर्माण के लिए टेंडर राशि को 57 करोड़ से करें ₹87 करोड़ तक पहुंचाया गया। इस मामले की विजिलेंस जांच कर रही है। आईएएस अधिकारी पर आरोप है कि इस राशि को गलत तरीके से बढ़ाया गया।

केस  2

प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डाक्टर डी सुरेश पर भी एंटी करप्शन ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामले में शिकंजा कसने की तैयारी में है। उनके खिलाफ जांच के लिए एसीबी ने राज्य सरकार से अनुमति मांगी है। आरोप है कि जानकारी के मुताबिक सेक्टर 56 के एक निजी स्कूल को वर्ष 2019 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक रहते हुए डॉ डी सुरेश कुमार ने डेढ़ एकड़ जमीन वर्ष 1972 की दर से आवंटित कर दी थी। यानी 27 साल पहले की कीमत पर जमीन आवंटित की गई जिससे राज्य सरकार को राजस्व में ₹25 करोड़ का नुकसान हुआ। उन पर इसके एवज में ₹25 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप भी है।

केस  3 

हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस विजय दहिया पर भी 3 माह के कार्यकाल में 90 करोड़ से ज्यादा के बिल पास करने की शिकायत पर कार्रवाई चल रही है। उन पर आरोप है कि हरियाणा कौशल विकास मिशन के कार्यकाल में 3 महीने में 90 करोड़ से ज्यादा के दिन पास किए गए। इस मामले में विजय दहिया अभी तक जांच एजेंसी के हाथ नहीं आए हैं। उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है।

तो क्या सिस्टम पूरी तरह भ्रष्ट हो गया है

राज्य के 3 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो या सरकार द्वारा की जा रही जांच से यह तो साबित हो गया है कि सिस्टम को भ्रष्टाचार का घुन लगा हुआ है। वह भी तब जब सरकार की ओर से दावा किया जाता रहा है कि इस मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए हैं। प्रदेश में भाजपा-जजपा की गठबंधन  सरकार पिछले साढ़े 8 साल से सत्ता में है। इस सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मीडिया में भी इस प्रकार की खबरें आती हैं कि पटवारी से लेकर तहसीलदार, पुलिसकर्मी से लेकर अधिकारी तक पकड़े भी जा रही है। देखा जाए तो यही सरकारी प्रयास कहीं ना कहीं इस बात को साबित करते हैं कि है कि सरकार या मुख्यमंत्री के प्रयासों के बावजूद हरियाणा में भ्रष्टाचार पूरी तरह से अपना प्रभाव जमाए हुए हैं। विपक्ष भी गाहे-बगाहे सरकार पर भ्रष्टाचार की बढ़ोतरी होने पर उंगली उठाता है। इस भ्रष्ट सिस्टम के पनपने में सरकार चलाने वालों पर विरोधी दलों द्वारा आरोप लगाया जाता रहा है।  इसके बावजूद सरकार सिस्टम सुधारने में नाकाम रही है।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से भ्रष्टाचार को रोकने के लिए निरंतर प्रयास भी चल रहे हैं। विजिलेंस विभाग को बदलकर एंटी करप्शन ब्यूरो का नाम दिया गया है। इसे पहले से ज्यादा पावर भी सौंप दी गई है ताकि सिस्टम में से भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए। छोटे कर्मचारियों और अधिकारियों के बाद अब आईएएस लेवल के अधिकारियों के भी भ्रष्टाचार में लिप्त होने की यह समाचार बाहर आने लगे हैं। लेकिन कहीं ना कहीं इससे साबित भी हो रहा है कि सरकार अपने सिस्टम से भ्रष्टाचार को हटाने में अभी कामयाब नहीं हो पाई है। इसका असर लोकसभा और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ता दिखेगा। सत्ता पक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही इन कार्रवाई को ही अपना हथियार बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने की दलील देगा तो विपक्ष के लिए प्रदेश के सत्ता तंत्र और नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के यही मामले बड़ा हथियार बनी दिखेंगे।

भ्रष्टाचार पर अंकुश, आईएएस और आईपीएस लॉबी में बढ़ा सकता है दरार

सरकार अपने ही भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार करना चाहती है। इसके लिए उसके इरादे भी नेक हैं और दृढ़ है, किंतु इस भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में प्रदेश में आईएएस लॉबी और आईपीएस लॉबी के बीच दरार धीरे-धीरे बढ़ रही है। आईएएस लॉबी की ओर से पिछले दिनों यह आरोप लगा था कि जानबूझकर उन्हें ही टारगेट किया जा रहा है। अब तक की रिपोर्ट भी बताती हैं कि पुलिस महकमे के इंस्पेक्टर लेवल तक के अधिकारियों पर तो एसीबी की निगाह पड़ी है, किंतु अभी तक कोई बड़ा आईपीएस अधिकारी उसके शिकंजे में नहीं आया है। देखा जाए तो इसी प्रकार भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार का काम राजस्थान में भी चल रहा है, लेकिन वहां कलेक्टर के अलावा एक पुलिस अधीक्षक पर भी केस दर्ज हुआ है। हो सकता है कि एसीबी की निगाह में आईपीएस लॉबी लेवल के कुछ अधिकारियों द्वारा की जा रही गड़बड़ियों पर हो। उन पर कार्रवाई भी करने की प्लानिंग बन रही हो, लेकिन अभी तक जिस तरीके से यह कार्रवाई चल रही है उससे यह भी सुगबुगाहट है कि मामला अभी एक तरफा ही चल रहा है। उसमें मुख्यमंत्री के इरादे भले ही भ्रष्टाचार मुक्त हरियाणा बनाने के हो, किंतु उसमें कहीं ना कहीं संतुलित स्थिति नहीं बन रही है।

 

 

 

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