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25 को भुंगारका आएंगे राव, अभी से धधकने लगा राजनीतिक अलाव - Ahirwal Today

नांगल चौधरी के विधायक डॉक्टर अभय सिंह यादव और राव इंद्रजीत सिंह में है 36 का आंकड़ा। विधायक विरोधी खेमा कर रहा है राव के सम्मान समारोह की तैयारी।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

सर्दी का सितम जारी है। ठंड इस कदर है कि दिन निकलने के काफी देर तक वातावरण में कोहरा छाया रहता है। इसी कोहरे के बीच इलाके में राजनीतिक अलाव जलने लगा है। इसका कारण है भुंगरका गांव में 25 जनवरी को होने वाला केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का सम्मान समारोह।

राव इंद्रजीत सिंह और नांगल चौधरी के विधायक डॉक्टर अभय सिंह यादव के बीच चली आने वाली तनातनी की खबरों के बीच केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह 25 जनवरी को नांगल चौधरी हलके के गांव भुंगारका में आएंगे। जहां उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। देखा जाए तो किसी भी केंद्रीय मंत्री का किसी गांव में जाने पर उनका सम्मान किया जाना सामान्य कार्यक्रम ही होता है, लेकिन इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि कुछ दिन पहले तक विधायक डॉक्टर अभय सिंह यादव के साथ रहने वाले गांव के सरपंच और पंचायत का विधायक के खिलाफ ही खड़ा हो जाना और उनके विरोधी केंद्रीय मंत्री का गांव में बुलाकर सार्वजनिक तौर पर सम्मान करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस कार्यक्रम की आड़ में उनके समर्थक राव विरोधी खेमे को अपनी ताकत दिखाने के मुहिम में जुट गए हैं।

दरअसल नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र का गांव भुंगारका बरसों से राजनीतिक सक्रियता के चलते अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यहां राव इंद्रजीत सिंह का पहले से बड़ा प्रभाव रहा है। पूर्व में यहां के सरपंच रहे अभय सिंह यादव उनके कट्टर समर्थक माने जाते रहे हैं। उनके प्रभाव से इस गांव में राव इंद्रजीत सिंह की मजबूत पैठ भी रही है। दूसरा राजनीतिक प्रभावी चेहरा अमर सिंह ब्रह्मचारी का है। उनकी अगुवाई में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के कार्यक्रम गांव में होते रहे हैं। एक दशक से यहां नई राजनीतिक गतिविधियां पनप रही है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉक्टर अभय सिंह यादव जब वर्ष 2013 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हुए तो उन्होंने भी इस गांव में अपनी पकड़ बनाने के लिए प्रयास किया। वर्ष 2014 के विधानसभा के चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह ने डॉक्टर अभय सिंह को जीत दिलाने में पूर्ण सहयोग किया था तो उसे समय उनके समर्थक सरपंच अभय सिंह यादव भी पूरी तरह विधायक के पक्ष में सक्रिय थे। उसके बाद राजेंद्र कुमार गांव में सरपंच बने। गांव में भारी राजनीतिक धड़ेबाजी के चलते पूर्व सरपंच अभय सिंह के सहयोग से उनके चाचा जगत सिंह यादव ने अगले चुनाव मैदान में राजेंद्र कुमार को पराजित किया। दोनों के बीच खेमेबाजी के बीच गांव में शराब का ठेका जलाने का विवाद चर्चा में आया। सरकारी अमानत में खयानत के आरोप में सरपंच जगत सिंह को जेल भी जाना पड़ा। इस बार जब चुनाव हुआ तो राजेंद्र कुमार सरपंच चुने गए। बताया जाता है कि अपने कुछ समर्थकों के दबाव और गांव में विकास कार्य करवाए जाने के चलते चुनाव जीतने पर सरपंच राजेंद्र कुमार विधायक से जुड़ गए। विधायक डाक्टर अभय सिंह यादव ने भी गांव के विकास कार्यों के लिए सहयोग दिया। इस दौरान गांव में अवैध कब्जे हटाने के मामले में सरपंच राजेंद्र कुमार का कुछ लोगों से विवाद हो गया और गोली तक चल गई। इस मामले में विधायक ने सरपंच का साथ देने की बजाय दूसरे पक्ष को सहयोग दिया। सरपंच को जेल जाना पड़ा। राजनीतिक धड़ेबाजी के चलते अब जेल से बाहर आने के बाद सरपंच विधायक से दूरी बनाते हुए राव इंद्रजीत सिंह के पक्ष में शामिल होकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विधायक के खिलाफ गांव में धड़ेबाजी इस कदर है कि पंचायत के सभी पंचों ने उपायुक्त को ज्ञापन देकर सरपंच को बहाल करने की मांग की l। जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने विधायक को ही गांव के सरपंच का चार्ज देने का प्रशासन से अनुरोध तक कर दिया है। अब 25 जनवरी को ग्राम पंचायत की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के स्वागत समारोह की तैयारी की जा रही है। यानि जब राव 25 तारीख को यहां आएंगे तो इलाके में नई राजनीतिक करवट भी बदलेगी।

 बता दे कि वर्ष 2014 के चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह के सहयोग से ही डॉक्टर अभय सिंह यादव विधायक बने थे। चर्चा है कि वर्ष 2019 में राव समर्थक कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर अभय सिंह को हराने में अंदरखाने भूमिका निभाई। राव इंद्रजीत सिंह की अहीरवाल में दशकों से मजबूत पकड़ बनी हुई है। परिसीमन से पहले जब महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुड़गांव संयुक्त रूप से लोकसभा क्षेत्र था तब राव इंद्रजीत सिंह यहां से सांसद भी रहे। उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री राव वीरेंद्र सिंह ने भी यहां का प्रतिनिधित्व किया। अहीरवाल में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए राव इंद्रजीत सिंह व उनकी पुत्री आरती राव  के नांगल चौधरी हलके के नायन, धोलेडा समेत अनेक गांवों में किए गए कार्यक्रमों से भी राव और विधायक डॉक्टर अभय सिंह के बीच में राजनीतिक खींचातानी चली आ रही है। उनके मंत्री ना बनने के पीछे भी राव इंद्रजीत सिंह को बड़ा कारण माना जाता है। यही कारण है कि 10 दिसंबर को दोगडा अहीर गांव में रैली करके डॉक्टर अभय सिंह ने जिले में अपने प्रभाव को सार्वजनिक तौर पर दिखाने का प्रयास किया था।

 

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