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भाजपा-जजपा गठबंधन पर संकट का साया - Ahirwal Today

दोनों दल हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर अलग-अलग चुनाव लड़ने की कर रहे हैं तैयारी। भिवानी महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चुनाव लड़ने के दिए संकेत।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

क्या हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी के बीच चल रहे गठबंधन पर संकट के बादल छा रहे हैं? सवाल सीधा है और उसका जवाब भी मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से खुद मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पिछले सप्ताह जब हरियाणा में आए तो उन्होंने बयान दिया था कि भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के सभी 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जीत हासिल करेगी । ठीक ऐसा ही बयान दो दिन तक नारनौल में कार्यकर्ताओं के बातचीत के दौरान और जनसंपर्क अभियान के दौरान अपनी सभाओं में जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद डॉक्टर अजय सिंह चौटाला ने दिए। उन्होंने भी अपने कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा। डॉक्टर अजय चौटाला का कहना था कि हरियाणा में पार्टी सभी 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की भी संभावना है कि लोकसभा के साथी हरियाणा विधानसभा के चुनाव भी हो जाए।

अब देखा जाए तो गठबंधन में शामिल दोनों पार्टियों की राष्ट्रीय अध्यक्ष एक स्वर में बात कर रहे हैं तो दिखता है की दाल में कुछ काला है। वैसे भी हरियाणा में पिछली बार जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो दोनों दलों ने एक दूसरे के खिलाफ आग उगली थी। एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप लगाए थे। हालत यह रही कि भारतीय जनता पार्टी सभी 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव जीती तो दूसरी तरफ जननायक जनता पार्टी के हाथ कुछ नहीं आया।

उसके बाद जो विधानसभा चुनाव हुए तो 75 पार का नारा देने वाली भाजपा 40 सीटों पर आकर सिमट गई। जेजेपी को 10 सीटों पर विजय मिली। इसके बाद सरकार बनाने के लिए दोनों पार्टी के बीच गठबंधन हुआ। पिछले साढ़े चार साल से दोनों दल मिलकर तो सरकार चला रहे हैं लेकिन गाहे बगाहे गठबंधन तोड़ने के लिए बीजेपी के सीनियर नेताओं के बयान आते रहते हैं। कई बार इस प्रकार की चर्चाएं तेजी से फैली टिकट बंधन अब समाप्त होने वाला है, लेकिन जजपा की ओर से ऐसी किसी भी प्रकार की चर्चाओं पर हमेशा यही बयान आता रहा कि गठबंधन मजबूत है। सरकार मजबूती से कम कर रही है। यह गठबंधन पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के सहमति से हुआ था।

इस प्रकार के बयान देकर पार्टी अपने आपको गठबंधन में शामिल बताती आ रही है लेकिन संभावना इसी बात की है कि जिस प्रकार 2019 में लोकसभा चुनाव में अकेले-अकेले चुनाव लड़ा था, इस प्रकार की स्थिति वर्ष 2024 के आम चुनाव में भी सामने आ सकती है।

क्यों बन रहे हैं आसार

अब दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिए गए बयान साफ तौर पर बता रहे हैं कि अभी तक किसी की ओर से भी इस प्रकार के संकेत नहीं दिए गए हैं कि गठबंधन में शामिल दल मिलकर चुनाव लडेंगे। जननायक जनता पार्टी भले ही एनडीए का हिस्सा है।  कुछ माह पूर्व हुई एनडीए की बैठक में जजपा की ओर से डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला शामिल हुए थे, लेकिन हालात लग नहीं रहे कि यह दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। ना ही इसके अभी तक कोई संकेत मिले हैं । दूसरी बात यह कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी गैर जाट राजनीति में अपना भविष्य ओर तीसरी बार सत्ता हासिल करने का सपना देख रही है। जाट वोटर भी भाजपा से पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं, जबकि जजपा का शीर्ष नेतृत्व जाट वर्ग के मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की ओर ध्यान देता आया है। ऐसे में भाजपा को गठबंधन में रहते हुए जाट वोटो के मिलने की आशंका कमी है। दोनों ताल अलग-अलग लड़ते हैं तो भाजपा गैर जाटों के अधिकतम वोटो को लक्ष्य करके चुनावी रणनीति बना सकती है।

राजस्थान में भी हो चुका है प्रयोग

अभी नवंबर माह में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में जननायक जनता पार्टी ने वहां 29 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इनमें से सभी की जमानत जब्त हो गई, लेकिन इतना रहा कि दो-तीन सीटों पर जजपा ने वोट कटवा की भूमिका निभाई। जिसका लाभ भाजपा को हुआ। संभावना यह भी मानी जा रही है कि अलग-अलग लड़ने पर यह फायदा दोनों दलों को मिल सकता है।

चारों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी

जननायक जनता पार्टी की ओर से जिला महेंद्रगढ़ की चारों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। लोकसभा के लिए भी पार्टी अपना बयान दे चुकी है। डॉक्टर अजय सिंह चौटाला के मुताबिक अगर कानूनी अड़चन नहीं आई तो वह खुद नहीं तो उनके छोटे बेटे दिग्विजय सिंह चौटाला भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव की तैयारी के कार्यक्रम दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला के दौरे के बाद शुरू भी कर दिए गए हैं। नारनौल में उनके पास राष्ट्रीय महासचिव व नगर परिषद चेयरपर्सन कमलेश सैनी का मजबूत चेहरा है। अटेली में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिमन्यु राव और हल्का अध्यक्ष कुलदीप कलवाड़ी सक्रिय हो चुके हैं। महेंद्रगढ़ में पिछली बार रमेश पालड़ी उम्मीदवार थे। दुष्यंत चौटाला का पुराने कार्यकर्ता राजकुमार खातोद  के घर भोजन करने जाने से अब माना जा रहा है कि पार्टी राजकुमार को बतौर उम्मीदवार मैदान में उतर सकती है।

नांगल चौधरी में हो सकता है नया उलटफेर

नांगल चौधरी में पूर्व विधायक मूलाराम और उनकी पत्नी मंजू चौधरी के कांग्रेस में शामिल हो जाने के बाद पार्टी को बड़ा झटका लगा। वहां से जिला अध्यक्ष डॉ मनीष शर्मा को सक्रिय किया गया है, लेकिन डॉक्टर अजय चौटाला के दो दिवसीय दौरे के दौरान नारनौल में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के यहां उनका चायपान पर जाना नांगल चौधरी में नई राजनीतिक चर्चाओ को जन्म दे गया। आना जा रहा है की नांगल चौधरी क्षेत्र में पार्टी अपनी खालीपन को किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को सामने लाकर भर सकती है। और इसकी जल्दी ही घोषणा हो जाने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। अगर ऐसा हुआ तो इस हलके के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

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