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राज्यमंत्री ओम प्रकाश यादव से टकराने वाली एसपी सुलोचना गजराज अब बनी एसएसपी - Ahirwal Today

अगस्त 2020 में भ्रष्ट बताए जाने पर दर्ज करवाई थी एफआईआर।

हरियाणा सरकार ने 4 आईपीएस अधिकारियों की प्रमोशन दी है। इन आईपीएस अधिकारियों को सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस से प्रमोट करके सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानि एसएसपी बनाया गया है। वर्ष 2010 बैच के प्रमोट होने वाले इन 4 आईपीएस अधिकारियों में सुलोचना गजराज, संगीता कालिया, राजेश दुग्गल और सुरेंद्र पाल सिंह शामिल हैं। इनमें नारनौल में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान सुलोचना गजराज नारनौल के विधायक तथा प्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ओम प्रकाश यादव से टकरा गई थी।

क्यों हुआ था टकराव

बात अगस्त 2020 की है। मामला स्थानीय भाजपा नेता से सम्बन्धित था। अब एक सप्ताह पहले ही जिला महेंद्रगढ़ के बीजेपी जिला अध्यक्ष बनाए गए दयाराम यादव के घर पर 29 अगस्त को घुसकर बदमाशों ने उनके बेटे के पैर में गोली मारी थी। गोली मारने के बाद वहां एक पर्ची छोड़ी, जिसमें 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। इस घटना के बाद एक पत्रकार से राज्यमंत्री सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता ओमप्रकाश यादव की बात हुई।

राज्यमंत्री ने आईपीएस को बताया भ्रष्ट

तब पत्रकार से बात करने के दौरान राज्यमंत्री ओपी यादव ने जिले की एसपी सुलोचना गजराज को जमकर खरी-खोटी सुनाई। यहां तक कि उन्होंने एसपी को नालायक तक कह दिया था। ऑडियो में मंत्री ने कहा 'मेरी कोई सुनता नहीं। मैं मंत्री होते हुए मैं यह बात कह रहा हूं। मैं खुद दुखी हूं, रो-रोकर मर लिए लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। यहां की एसपी भ्रष्ट है। गुंडों से मिली हुई है। सारा काम एसपी करवा रही है। मैं बड़ा दुखी हूं, यह एसपी बहुत नालायक है और बदमाशों से मिली हुई है। कमिशन इकट्ठा करने के अलावा कोई काम नहीं है।'

वीडियो वायरल होने पर मचा हंगामा, एसपी ने दर्ज कराया केस

पत्रकार और राज्यमंत्री की बातचीत का यह ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। ऑडियो वायरल होने के बाद मंत्री और आईपीएस के बीच खींचतान बढ़ गई। ऑडियो वायरल होने के 24 घंटे के अंदर ही एसपी सुलोचना का नारनौल से ट्रांसफर हो गया और उनके स्थान पर चंद्रमोहन को एसपी बनाया गया। अपनी ट्रांसफर होने के बाद चार्ज देने से पहले आईपीएस सुलोचना ने नारनौल थाने में देर रात 11:55 पर एफआईआर दर्ज कराई। इस एफआईआर में उन्होंने अज्ञात के खिलाफ दंगा भड़काने व अपमान जनक शब्दों का प्रयोग करने का केस दर्ज कराया। उसके बाद मामले को क्राइम ब्रांच को जांच के लिए सौंपा गया।

 

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