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दानसिंह की आड़, हुडा ने बंसीलाल परिवार को निपटाया - Ahirwal Today

किरण चौधरी के अगले कदमों पर रहेगी सबकी नजर। 2 दिन पहले श्रुति ने D की हार का कर दिया था एलान।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

3 दिन पहले सोशल मीडिया में हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों की एक सूची जारी हुई थी, जिसे बाद में फेक बता दिया गया। उस सूची के जारी होने के बाद भिवानी महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस टिकट की प्रबल दावेदार श्रुति चौधरी ने एक ट्वीट पर D की हार का ऐलान किया। वह बात अलग रही कि करीब 20 मिनट बाद ही उसे वापस भी कर दिया गया। शायद पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की पुत्री श्रुति चौधरी को आभास हो गया था कि उसकी टिकट काट दी गई है। उसके स्थान पर दूसरे का नाम फाइनल हो गया है। अब उस डी के मायने कांग्रेस के भावी उम्मीदवार राव दान सिंह रहे  या भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित किया जा चुके मौजूदा सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह के नाम पर थे। क्योंकि दोनों के नाम की शुरुआत D से होती है। अब जब 25 अप्रैल को कांग्रेस की ओर से सूची जारी की गई तो भिवानी महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से श्रुति की बजाय राव दान सिंह के नाम का ऐलान कर दिया गया यह बात भी साबित हो गई थी कहीं ना कहीं श्रुति को अपनी टिकट कट जाने का खटका भी था।

25 मई को हरियाणा में लोकसभा के सभी 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस ने देर से ही सही इन सीटों के लिए ठीक 1 महीने पहले 25 अप्रैल को अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। गुरुग्राम सीट में अभी पेज फंसा हुआ है। उम्मीद है कि अगले दो दिनों में यहां की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। कप्तान अजय सिंह या राज बब्बर में से कौन टिकट आने में सफल रहेगा।

इस चुनावी लिस्ट को अगर ध्यान से देखें तो इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खेमे का प्रभाव ज्यादा नजर आ रहा है। एसआरके ग्रुप को अथक प्रयास करने और हरियाणा में परिवर्तन यात्रा निकल जाने के बावजूद उनकी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हो पाया। केवल कुमारी शैलजा ही सिरसा से टिकट पाने में सफल रही। अब हालत में की भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाली इन उम्मीदवारों की सूची के बाद कांग्रेस अधिकतम सीट जीतने के लिए भी पूरी तरह प्रयास करेगी।

अगर हम इस सूची में भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र का अवलोकन करें तो देखा जाए तो पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के परिवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एकदम दरकिनार करने में सफलता प्राप्त कर ली है। सूत्र बताते हैं कि श्रुति से लगातार दो बार चुनाव हार जाने से कांग्रेस हाईकमान में उसकी स्थिति काफी कमजोर थी। हुड्डा खेमे की ओर से श्रुति की बजाय उसकी मां तथा पूर्व मंत्री किरण चौधरी को मैदान में उतरने की दलील दी गई थी, लेकिन किरण ने इसके लिए इंकार कर दिया। वह अपने राजनीतिक उत्तराधिकार के रूप में श्रुति को ही आगे रखना चाहती थी। इसके लिए पार्टी हाई कमान तक अनेक प्रयास किए गए, लेकिन जारी की सूची बताती है कि किरण चौधरी के सभी प्रयास निष्फल रहे।

अब भले ही उसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सभी इच्छित उम्मीदवारों को जीता कर लाने का हाई कमान को दिया था भरोसा हो या विधानसभा में भी हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाने जाने के लिए उनके महत्व को ध्यान में रखकर हाई कमान में लोकसभा चुनाव में ही उन्हें पूरी कमान संभालने वाली हरी झंडी दे दी हो। खैर, अब मुख्य मुकाबला लगातार दो बार से सांसद बनते आ रहे चौधरी धर्मवीर सिंह और महेंद्रगढ़ से अनेक बार विधायक रहे पूर्व सीपीएस राव दान सिंह के बीच होगा। महेंद्रगढ़ जिले के चारों हल्का को अहीर बाहुल्य माना जाता है। जाट लैंड में पूर्व सीएम हुड्डा की पकड़ है । शायद यही समीकरण हुड्डा खेमे की ओर से उन्हें चुनाव जीतने वाले चेहरे के रूप में कांग्रेस हाई का मन के सामने रखे गए होंगे, लेकिन इस सब के बावजूद जेजेपी की ओर से भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में पिछली बार के आईएनएलडी की टिकट पर दूसरे नंबर पर रहे नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह को उम्मीदवार बनाना भी महत्व रखता है। यादव समुदाय में पैठ बनाने वाले बहादुर सिंह का मैदान में सामने होना राव दान सिंह के लिए दिक्कत भरा हो सकता है। इन दोनों के बीच आपसी प्रति घंटा भी जग जाहिर है।

दूसरे भाजपा को जाट मतदाताओं से भले ही उतना रुझान में मिलता दिख रहा हो, लेकिन अब अकेले जाट उम्मीदवार के तौर पर चौधरी धर्मवीर सिंह के सामने रह जाने से बदलाव की संभावना भी बन सकती है। हालांकि मौजूदा स्थिति में चौधरी धर्मवीर का जो अपने संसदीय क्षेत्र में कड़ा विरोध हो रहा है वह भी उनकी जीत की हैट्रिक को रोकने की संभावनाओं को व्यक्त कर रहा है। सबके बीच टिकट कट जाने के बाद किरण चौधरी धड़ा क्या रुख अपनाएगा यह भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाला हो सकता है जिस पर राजनीतिक पंडित होगी निगाहें टिकी रहेंगी। इस बीच इनेलो की ओर से भी कोई मजबूत उम्मीदवार आता नहीं दिख रहा। बसपा में अटेली के बोचाडिया गांव के प्रमुख उद्योगपति राव ओमप्रकाश इंजीनियर को भिवानी महेंद्रगढ़ क्षेत्र से टिकट देने का निर्णय कर लिया है। इसी सप्ताह अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों के मैदान में सामने आ जाने के बाद बनने वाले राजनीतिक प्रदेशों की संभावना बन रही है।

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