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खट्टर राज की जन नाराजगी का मोल चुकाएंगे भाजपा उम्मीदवार ? - Ahirwal Today

1 महीने पहले उम्मीदवार घोषित करने वाली भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को लोगों की नाराजगी का करना पड़ रहा है सामना।

धर्मनारायण शर्मा। नारनौल

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस ने मतदान से ठीक 1 महीना पहले अपने उम्मीदवारों की सूची कल देर रात जारी की, जबकि बीजेपी पहले ही 6 उम्मीदवारों को घोषित करके चुनावी समर में महीने भर से सक्रिय नजर आ रही है। इस पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री और अप्रत्यक्ष तौर पर हरियाणा में बीजेपी संगठन का काम देख रहे मनोहर लाल खट्टर समेत अनेक वरिष्ठ नेता कम से कम दो बार पूरे प्रदेश में या तो दौरे कर चुके हैं या संपर्क बनाए हुए हैं। 

कहने को तो बीजेपी ने काफी पहले से ही अपने उम्मीदवार चुनावी उतारकर चुनावी रणनीति पर अमल शुरू कर दिया था। जबकि कांग्रेस इसमें काफी पीछे नजर आई। अब इस पार्टी की ओर से अपने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की गई है और आम आदमी पार्टी को एक सीट कुरुक्षेत्र पहले ही दे दी गई है तो  जो हालात बन रहे हैं, उसमें बीजेपी की बजाय कांग्रेस कहीं आगे दिख रही है। इसका कारण भी है। भाजपा ने जिस तरीके से प्रत्याशी घोषित करने में पहल की थी, उसका राज्य भर में अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र में जो विरोध दिखाई दे रहा है, उसका लाभ मिलने की बजाय अब नुकसान ज्यादा होता लग रहा है।

हालांकि पार्टी के संगठन के प्रमुख पदाधिकारी का कहना है कि पार्टी इस नाराजगी का भी लाभ उठाएगी। वह ऐसे रूठों को मनाने में सफल हो रही है और इसके लिए लगातार प्रयासरत है, जबकि अभी तक कांग्रेस पूरी तरह से सभी प्रत्याशी भी घोषित नहीं कर पाई है। उनका मानना है कि ऐसे में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ेगा।

दूसरी तरफ कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम को लेकर जो गुटबाजी सामने आ रही थी, वहां देर से ही सही, टिकटों की घोषणा के बाद अब पूरा संगठन एकजुट होकर हरियाणा में अपनी गतिविधियों को तेज करने की तैयारी में जुट गया है। जैसे ही उम्मीदवारों की घोषणा हुई इस तेजी के साथ अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र में पार्टी ने सक्रियता बढ़ा दी। हालांकि यह चर्चाएं भी सामने आ रही है कि श्रुति चौधरी और चौधरी बिजेंद्र सिंह को टिकट ने मिलने से उनके समर्थकों में निराशा हावी हुई है। दोनों ही नेताओं की ओर से अपने समर्थकों के साथ बैठक किए जाने की बात भी सामने आ रही है लेकिन मानना यही है कि यह लोग समय की नजाकत को भांपते हुए और हाई कमान की नाराजगी मोल लेने की बजाय विधानसभा चुनाव के लिए अपना सुरक्षित स्थान ढूंढने का प्रयास करेंगे। अभी कांग्रेस के खिलाफ कोई निर्णय करने की बजाय कांग्रेस के साथ रहकर ही काम करना कबूल कर लेंगे।

चर्चा इस बात की भी है कि सूची को घोषित करने से पहले प्रदेश की एसआरके और हुडा धड़े की राजनीति को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी तरह समझा और हालात को गंभीरता से लिया। यही कारण है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को महत्व देते हुए उनके द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों को ही महत्व दिया। ऐसे में माना जा रहा है कि हरियाणा में लोकसभा चुनाव की बजाय पार्टी चार माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लक्ष्य में रखकर यह चुनाव लड़ेगी। अगले 4 महीना बाद हरियाणा में पार्टी 10 साल के अंतराल के बाद सत्ता हासिल करने के लिए लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल फाइनल की तरह ही लड़ेगी।

दूसरी ओर हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में जनादेश में रोज की स्थिति को देखते हुए भले ही मुख्यमंत्री को मनोहर लाल को हटा दिया है तथा भाजपा जजपा गठबंधन सरकार भी समाप्त कर दिया है। उसकी जगह अपने अपने दम पर मुख्यमंत्री का बदलाव करके नायब सैनी को कमांड्स सौंप दी है। पार्टी का यह ओबीसी फैक्टर कितना फायदा पहुंचाएगा, इसके बारे में अभी तो कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन मुख्यमंत्री की सभा में भरसक प्रयास करने के बावजूद काम संख्या में लोगों की उपस्थिति, यह एहसास कर रही है कि लोग भाजपा की 10 साल की इस सरकार से का से नाराज हैं और वह इसका बदला चुनाव परिणाम में दिखा भी सकते हैं। राज्य में लोग खट्टर सरकार के कामकाज से काफी नाराज रहे। करीब छोड़ 9:30 साल के कार्यकाल में हर वर्ग के लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा नेतृत्व भले ही इस जाट गैर जाट का चुनाव बनाने का प्रयास करें लेकिन लगता यही है कि युवाओं में बेरोजगारी, अग्निवीर, महंगाई जैसे मुद्दे प्रभावी रहेंगे और उनके नाराजगी को भाजपा सरकार या उसके उम्मीदवारों को झेलना पड़ सकता है।

 

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